अपना नहीं कही तुम बिन और ठिकाना है

अपना नहीं कही तुम बिन और ठिकाना है,
अपना नहीं कही तुम बिन और ठिकाना है,
सब जगहों से एक दिन उठ जाना है,
विरथा है तुम बिन सब सब बेगाना है,
एक दिन तो सबसे धोखा खाना है,
सब जगहों से एक दिन उठ जाना है।।

करो ऐसी कृपा ही रघुवर भटके न हम,
आजमा ले तुम्हे पहले ही,
एक दिन तो आजमाना है,
जाने ना दो समय हमारा,
अपने में लागलो,
हम है तुम्हारे अपने एक दिन तो,
अपने से लगाना है,
एक दिन तो अपने से लगाना है।।

अपना नहीं कही तुम बिन और ठिकाना है,
सब जगहों से एक दिन उठ जाना है।।

क्यों दूर दूर रहते हो हम भटक जाएंगे,
पछताओगे बाद में तुम,
एक दिन तो हमे अपनाना है,
सम्भालो हमे हे प्रभु जी गिरने न दो कूप में,
तुम्हारे सिवा नहीं हमारा कोई तुम्ही उठाना है,
अपना नहीं कही तुम बिन और ठिकाना है,
सब जगहों से एक दिन उठ जाना है।।

अपना नहीं कही तुम बिन और ठिकाना है,
सब जगहों से एक दिन उठ जाना है।।

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