एकादशी भजन लिरिक्स इन हिंदी

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एकादशी भजन लिरिक्स इन हिंदी

Ekadashi Bhajan Lyrics In Hindi–Maine gyaras ka kirtan karaya angna

मैने ग्यारस का कीर्तन कराया अंगना

मैने ग्यारस का कीर्तन कराया अंगना,
मैने ग्यारस का कीर्तन कराया अंगना,
कराया अंगना हां कराया अंगना,
कराया अंगना हां कराया अंगना,
मैने ग्यारस का कीर्तन कराया अंगना,
मैने ग्यारस का कीर्तन कराया अंगना।।
फूलों से सुंदर आसन सजाया,
फूलों से सुंदर आसन सजाया,
आसन पे मैया को बिठाया,
आसन पे मैया को बिठाया,
मैया देगी आशीष हमारे अंगना,
मैया देगी आशीष हमारे अंगना,
मैने ग्यारस का कीर्तन कराया अंगना,
मैने ग्यारस का कीर्तन कराया अंगना।।
मैया के लिए मैंने टीका मंगाया,
मैया के लिए मैंने टीका मंगाया,
टीका मंगाया हां टीका मंगाया,
टीका मंगाया हां टीका मंगाया,
मैया सिंदुरा लगाएंगी हमारे अंगना,
मैया सिंदुरा लगाएंगी हमारे अंगना,
मैने ग्यारस का कीर्तन कराया अंगना,
मैने ग्यारस का कीर्तन कराया अंगना,
कराया अंगना हां कराया अंगना,
कराया अंगना हां कराया अंगना,
मैने ग्यारस का कीर्तन कराया अंगना,
मैने ग्यारस का कीर्तन कराया अंगना।।

मैया के लिए मैंने चूड़ियां मंगाईं,
मैया के लिए मैंने चूड़ियां मंगाईं,
चूड़ियां मंगाई हां चूड़ियां मंगाई,
चूड़ियां मंगाई हां चूड़ियां मंगाई,
मैया मेंहदी लगाएंगी हमारे अंगना,
मैया मेंहदी लगाएंगी हमारे अंगना,
मैने ग्यारस का कीर्तन कराया अंगना,
मैने ग्यारस का कीर्तन कराया अंगना,
कराया अंगना हां कराया अंगना,
कराया अंगना हां कराया अंगना,
मैने ग्यारस का कीर्तन कराया अंगना,
मैने ग्यारस का कीर्तन कराया अंगना।।

मैया के लिए मैंने पायल मंगाई,
मैया के लिए मैंने पायल मंगाई,
पायल मंगाई हां पायल मंगाई,
पायल मंगाई हां पायल मंगाई,
मैया महावर लगाएंगी हमारे अंगना,
मैया महावर लगाएंगी हमारे अंगना,
मैने ग्यारस का कीर्तन कराया अंगना,
मैने ग्यारस का कीर्तन कराया अंगना,
कराया अंगना हां कराया अंगना,
कराया अंगना हां कराया अंगना,
मैने ग्यारस का कीर्तन कराया अंगना,
मैने ग्यारस का कीर्तन कराया अंगना।।

मैया के लिए मैंने चोला मंगाया,
मैया के लिए मैंने चोला मंगाया,
चोला मंगाया हां चोला मंगाया,
चोला मंगाया हां चोला मंगाया,
मैया ओढ़ेंगी चुनरिया हमारे अंगना,
मैया ओढ़ेंगी चुनरिया हमारे अंगना,
मैने ग्यारस का कीर्तन कराया अंगना,
मैने ग्यारस का कीर्तन कराया अंगना,
कराया अंगना हां कराया अंगना,
कराया अंगना हां कराया अंगना,
मैने ग्यारस का कीर्तन कराया अंगना,
मैने ग्यारस का कीर्तन कराया अंगना।।

एकादशी की पावन आरती

ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता

विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता ।। ॐ।।

तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी ।

गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी ।।ॐ।।

मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।

शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई।। ॐ।।

पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है,

शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै ।। ॐ ।।

नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।

शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै ।। ॐ ।।

विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी,

पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की ।। ॐ ।।

चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली,

नाम बरुथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली ।। ॐ ।।

शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी,

नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी।। ॐ ।।

योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।

देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी ।। ॐ ।।

कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।

श्रावण शुक्ला होय पवित्रा आनन्द से रहिए।। ॐ ।।

अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।

इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला।। ॐ ।।

पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।

रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी ।। ॐ ।।

देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।

पावन मास में करूं विनती पार करो नैया ।। ॐ ।।

परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।।

शुक्ल मास में होय पद्मिनी दुख दारिद्र हरनी ।। ॐ ।।

जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।

जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै।। ॐ ।।

Sawre tera dar jannat ki dagar,सांवरे तेरा दर जन्नत की डगर, मुझे खाटू बुलाया तेरा शुक्रिया,shyam bhajan सांवरे तेरा दर जन्नत की डगर, मुझे खाटू बुलाया तेरा शुक्रिया

तर्ज,जबसे देखा तुझे मुरली वाले

सांवरे तेरा दर जन्नत की डगर, मुझे खाटू बुलाया तेरा शुक्रिया।
मेरी तुझसे से गुजर रहमत की नजर, तूने ढाली जो मुझपे तेरा शुक्रिया।
मैं कुछ भी ना था आज जो कुछ बना, तूने अपना बनाया तेरा शुक्रिया।

मेरे बाबा मैं एहसान कितनु गिनु,
हर सांस मेरी तेरे नाम है,
मन हुआ बावरा मिल गया सांवरा, और गले से लगाया तेरा शुक्रिया।
सांवरे तेरा दर जन्नत की डगर, मुझे खाटू बुलाया तेरा शुक्रिया।
मेरी तुझसे से गुजर रहमत की नजर, तूने ढाली जो मुझपे तेरा शुक्रिया।

आंख उनकी झुकी जो मिलाते न था,
आंख अपनी कभी भी मेरी आंख से,
ख़ाख़ में था खड़ा तू दयालु बड़ा,
हर नजर में वसाया तेरा शुक्रिया।
सांवरे तेरा दर जन्नत की डगर,मुझे खाटू बुलाया तेरा शुक्रिया।
मेरी तुझसे से गुजर रहमत की नजर, तूने ढाली जो मुझपे तेरा शुक्रिया।

छूटे न दर तेरा अब कभी सांवरे,
जीना पाएंगे वरना तेरे बावरे।
प्यार की ये नजर सब पे कर सांवरा,
रहे दिल में समाया तेरा शुक्रिया।
सांवरे तेरा दर जन्नत की डगर,मुझे खाटू बुलाया तेरा शुक्रिया।
मेरी तुझसे से गुजर रहमत की नजर, तूने ढाली जो मुझपे तेरा शुक्रिया।

Ekadashi sab vrato me badi hai,एकादशी सब व्रतों में बड़ी है,ekadashi bhajan
एकादशी सब व्रतों में बड़ी है

एकादशी सब व्रतों में बड़ी है।एकादशी सब व्रतों में बड़ी है।

सब देवों में शिवजी बड़े हैं, इनकी तो पूजा श्री राम ने करी है। एकादशी सब व्रतों में बड़ी है।एकादशी सब व्रतों में बड़ी है।

सब वृक्षों में पीपल बड़ा है, इनकी तो पूजा ब्रह्मा जी ने करी है। एकादशी सब व्रतों में बड़ी है।एकादशी सब व्रतों में बड़ी है।

सब देवियों में गौरी बड़ी है, इनकी तो पूजा सीता जी ने करी है।एकादशी सब व्रतों में बड़ी है।एकादशी सब व्रतों में बड़ी है।

सब पौधों में तुलसी बड़ी है, इनकी तो पूजा रुक्मणी ने करी है।एकादशी सब व्रतों में बड़ी है।एकादशी सब व्रतों में बड़ी है।

सब सखियन में राधा जी बड़ी है। इनकी तो पूजा सब सखियां ने करी है। एकादशी सब व्रतों में बड़ी है।एकादशी सब व्रतों में बड़ी है।

Mujhe sawre ke dar se kuch khas mil gaya,मुझे सांवरे के दर से कुछ ख़ास मिल गया है,shyam bhajan मुझे सांवरे के दर से कुछ ख़ास मिल गया है।

मुझे सांवरे के दर से कुछ ख़ास मिल गया है।
जो अब तलक ना टूटा श्याम,
जो अब तलक ना टूटा श्याम वो विश्वास मिल गया है।
मुझे सांवरे के दर से कुछ ख़ास मिल गया है।

इसके भरोसे मैं तो आगे ही बढ़ता जाता,
हो लाख रहने धुंधली पर डर नहीं सताता।
ये साथ चल रहा है एहसास मिल गया है,
जो अब तलक ना टूटा श्याम,
जो अब तलक ना टूटा श्याम वो विश्वास मिल गया है।
मुझे सांवरे के दर से कुछ ख़ास मिल गया है।

जबसे जुड़ा हूँ दर से मेरी मौज हो गयी है।
होली दिवाली मेरी अब रोज़ हो गई है,
अंधियारे मन को मेरे प्रकाश मिल गया है।
जो अब तलक ना टूटा श्याम,
जो अब तलक ना टूटा श्याम वो विश्वास मिल गया है।
मुझे सांवरे के दर से कुछ ख़ास मिल गया है।

क्या होगा क्या ना होगा जब दिल समझ ना पाया।
मुझको भरोसा इसका उस वक़्त काम आया।
मुझे हारने ना देगा आभास मिल गया है,
जो अब तलक ना टूटा श्याम,
जो अब तलक ना टूटा श्याम वो विश्वास मिल गया है।
मुझे सांवरे के दर से कुछ ख़ास मिल गया है।

Gyaras ko din aayo balam mohe,ग्यारस को दिन आयो, बलम मोहे मंदिर तो जाने दे,ekadashi bhajan ग्यारस को दिन आयो, बलम मोहे मंदिर तो जाने दे।

ग्यारस को दिन आयो, बलम मोहे मंदिर तो जाने दे।

न चाहिए मोहे मांग का टीका, न चाहिए मोहे कान के झुमका। लागो हरि पे ध्यान, बलम मोहे कीर्तन तो करने दो।ग्यारस को दिन आयो, बलम मोहे मंदिर तो जाने दे।

न चाहिए मोहे गले का हरवा, न चाहिए मोहे हाथों के कंगना। लागो हरि पे ध्यान, बलम मोहे कीर्तन करने दो।ग्यारस को दिन आयो, बलम मोहे मंदिर तो जाने दे।

न चाहिए मोहे पैरों की पायल, न चाहिए मोहे महंगी साड़ी। लागो हरि पे ध्यान, बलम मोहे कीर्तन करने दो।ग्यारस को दिन आयो, बलम मोहे मंदिर तो जाने दे।

न चाहिए मोहे लड्डू पेड़ा, न चाहिए मोहे रबड़ी जलेबी। लागो हरि पे ध्यान, बलम मोहे कीर्तन तो करने दो।ग्यारस को दिन आयो, बलम मोहे मंदिर तो जाने दे।

Bahu bhojan na karu me aaj, mere gyaras,बहु भोजन ना करूं मैं आज, आज मेरे ग्यारस है,ekadashi bhajan बहु भोजन ना करूं मैं आज, आज मेरे ग्यारस है।

बहु भोजन ना करूं मैं आज, आज मेरे ग्यारस है।

सुबह सवेरे मैंने गंगा नहाई, फिर चाय बनाई कड़कदार, आज मेरे ग्यारस है। बहु भोजन ना करूं मैं आज, आज मेरे ग्यारस है।

ग्यारह बजे बहु पुछण को आई। मैं तो जपु राम राम राम, आज मेरे ग्यारस है। बहु भोजन ना करूं मैं आज, आज मेरे ग्यारस है।

चार बजे दूध मेवा मंगाई। और खीर बनाई खोएदार आज मेरे ग्यारस है। बहु भोजन ना करूं मैं आज, आज मेरे ग्यारस है।

शाम पड़ी बुढ़ऊ घर आए।वो तो मुंह मुंह ताके हमार,आज मेरे ग्यारस है। बहु भोजन ना करूं मैं आज, आज मेरे ग्यारस है।

पीछे से बुढ़ऊ मेवा ले आए।बोले मेवा खा लो मेरी जान, आज मेरे ग्यारस है। बहु भोजन ना करूं मैं आज, आज मेरे ग्यारस है।

Gyaras mata se milan kaise hoy,मिलन कैसे होय की पांचों खिड़की बंद पड़ी,ekadashi bhajan
मिलन कैसे होय की पांचों खिड़की बंद पड़ी। ग्यारस माता से मिलन कैसे होय की पांचों खिड़की बंद पड़ी।

पहली खिड़की खोलकर देखूं, कूड़ा-कचरा होय।
मुझमें इतनी अकल नहीं आई कि झाड़ू-बुहारा करती चलूं। ग्यारस माता से,मिलन कैसे होय की पांचों खिड़की बंद पड़ी।

दूजी खिड़की खोलकर देखूं, गंगा-जमुना बहे।
मुझमें इतनी अकल नहीं आई कि स्नान करके चलूं। ग्यारस माता से,मिलन कैसे होय की पांचों खिड़की बंद पड़ी।

तीजी खिड़की खोलकर देखूं, घोर अंधेरा होय।
मुझमें इतनी अकल नहीं आई कि दीया तो लगाती चलूं। ग्यारस माता से,मिलन कैसे होय की पांचों खिड़की बंद पड़ी।

चौथी खिड़की खोलकर देखूं, तुलसी क्यारा होय।
मुझमें इतनी अकल नहीं आई कि जल तो चढ़ाती चलूं। ग्यारस माता से,मिलन कैसे होय की पांचों खिड़की बंद पड़ी।

पांचवीं खिड़की खोलकर देखूं, सामू मंदिर होय।
मुझमें इतनी अकल नहीं आई कि पूजा-पाठ करती चलूं। ग्यारस माता से,मिलन कैसे होय की पांचों खिड़की बंद पड़ी।

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