ऐरी नैनं में श्याम समाये गयो री

ऐरी नैनं में ओरी नैनं में हारी नैनं में
श्याम समाये गयो री
मोहे प्रेम का रोग लगाये गयो री,
ऐरी नैनं में श्याम समाये गयो री

लुट जाउंगी श्याम तेरी लटकन पे
बिक जाउंगी श्याम तेरी मटकन पे
वो तो मधुर मधुर मुस्काये गया रे
वो तो मधुर मधुर मुस्काये गयो रे
मोहे प्रेम का रोग लगाये गयो री

मर जाउंगी श्याम तोरे अधरं पे
वारि जाउंगी श्याम तोरे नैनं पे
वो तो तिरछी वो तो तिरछी
वो तो तिरछी नजरियाँ चलाए गयो री,
मोहे प्रेम का रोग लगाये गयो री,

ये तो पगल को प्यारो है नन्द लाल
दीवाने पड़े जाके सब ग्वाला
यो तो सपने में जो तो सपने में
यो तो सपने में वो बतलाये गयो री,
मोहे प्रेम का रोग लगाये गयो री,

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