ऐसे किशोरी तुझे ढूंढ रहा

तू ही मेरे मन की अभिलाषा,
तेरी सेवा निसदिन करता रहूं मैं,
ऐसे किशोरी तुझे ढूंढ रहा,
प्यासा हिरन जैसे ढूंढे है जल को,
ऐसे किशोरी तुझे ढूंढ रहा।।

तू जो मेरे मन में वास करे,
पाप से निसदिन बचता रहूँ मैं,
ऐसे किशोरी तुझे खोज रहा,
प्यासा हिरन जैसे ढूंढे है जल को,
ऐसे किशोरी तुझे ढूंढ रहा।।

ना भावे मने माखन मिश्री,
अब ना कोई मिठाई,
म्हारी जीभड़िया ने भावे,
राधा नाम मलाई वृषभान की लली तो,
गुड़धाणी लागे महारानी लागे,
मने खारो खारो जमना जी को पानी लागे,

रूप रंग की छबीली पटरानी लागे, महारानी लागे,
मने खारो खारो जमना जी को पानी लागे,

जमना जी तो कारी कारी राधा गौरी गौरी,
वृन्दावन में धूम मचावे बरसाने की छोरी,
बृज धाम राधा जू की राजधानी लागे,
महारानी लागे मने खारो खारो,
जमना जी को पानी लागे।।

प्यासा हिरन जैसे ढूंढे है जल को,
ऐसे किशोरी तुझे ढूंढ रहा।।

Leave a Reply