ऐ मुरली वाले मेरे कन्हैया बिना तुम्हारे तड़प रहे हैं

ऐ मुरली वाले मेरे कन्हैया बिना तुम्हारे तड़प रहे हैं
मुख चंद्र मनोहर देखे बिना
अब तो सुख मोहन सुख होता नहीं
अब तो सुख मोहन सुख होता नहीं

तुम माया के वेश अनेक धरो पर मैं अब खाऊंगा गोता नहीं
सच मानो वियोग में आपके मैं दिन में जगता निष् सोता नहीं
यदि चित्ता चुराते नहीं तुम तो इतना कभी भूलके रोता नहीं।।

ऐ मुरली वाले मेरे कन्हैया बिना तुम्हारे तड़प रहे हैं
ऐ मुरली वाले मेरे कन्हैया बिना तुम्हारे तड़प रहे हैं
तुम्हारी यादो में प्राण प्यारे आँखों से आंसू छलक रहे है
ऐ मुरली वाले मेरे कन्हैया बिना तुम्हारे तड़प रहे हैं।।

मुझे है कितनी तुमसे मोहब्बत कभी जरा आजमा के देखो,
तुम्हारे कदमों में मर मिटेंगे दिल में ये अरमां मचल रहे हैं,
ऐ मुरली वालें मेरे कन्हैया बिना तुम्हारे तड़प रहे हैं।।

मुझे है चाहत बस एक तेरी ना छोड़ना तुम मुझे अकेला,
तुम मुझसे बस इतना सा कहदो,मिलने को तुमसे हम चल रहे हैं,
ऐ मुरली वालें मेरे कन्हैया बिना तुम्हारे तड़प रहे हैं ।।

हम तुमसे दामन फैलाके मांगे रहमत की अपनी तुम भीख दे दो,
‘चित्र विचित्र’ भी ऐ कमली वाले तेरे कर्म पे ही पल रहे हैं,
ऐ मुरली वालें मेरे कन्हैया बिना तुम्हारे तड़प रहे हैं ।।

ऐ मुरली वाले मेरे कन्हैया बिना तुम्हारे तड़प रहे हैं
ऐ मुरली वाले मेरे कन्हैया बिना तुम्हारे तड़प रहे हैं
तुम्हारी यादो में प्राण प्यारे आँखों से आंसू छलक रहे है
ऐ मुरली वाले मेरे कन्हैया बिना तुम्हारे तड़प रहे हैं।।

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