ऐ श्याम मैं हार गया मुझे अपनी शरण लेलो

श्याम मैं हार गया मुझे अपनी शरण लेलो
करुनानिधि केहलाते हो मुझपे भी किरपा कर दो ।।

दुनिया ने सताया है अपनो ने रुलाया है,
तकदीर का मारा हु अब दर तेरा पाया है,
तुम ना मुझे ठुकराना चाहे प्राण मेरे लेलो
करुनानिधि केहलाते हो मुझपे भी किरपा कर दो।।

अब हार गया मोहन दुखड़ो ने घेरा है,
नही मेरा कोई तुम बिन चहु और अँधेरा है
ज्योति माये नैनो से मेरी और जरा देखो
करुनानिधि केहलाते हो मुझपे भी किरपा कर दो।।

शशी रुख तेरी और किया दुनिया को छोड़ दिया
अब आकर थाम मुझे नाता तुझसे जोड़ लिया
उपकार तेरा भगवन मुझ पर भी जरा करदो
करुनानिधि केहलाते हो मुझपे भी किरपा कर दो।।

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