काहे प्राणी भटक रहा है जीवन है अनमोल रे

सीता राम सीता राम, सीता राम बोल,
राधे श्याम राधे श्याम, राधे श्याम बोल
काहे प्राणी भटक रहा है, जीवन है अनमोल रे,
सीता राम सीता राम, सीता राम बोल,
राधे श्याम राधे श्याम, राधे श्याम बोल ll

न कर बंदे मेरी मेरी, जीवन ख़ाक की ढेरी ll
चार दिनों की चाँदनी है, और फिर है रात अँधेरी l
धर्मराज के आगे तेरे , खुल जाएंगे पोल रे…
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

माटी के रंगीन खिलौने, माटी में मिल जाएगा ll
आज नहीं तो कल यहॉं पर, कर्मो का फ़ल पाएगा l
हीरा जन्म न फ़ेर मिलेगा, कूड़े में न रोल रे…
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

साथी ख़ाली हाथ गए हैं, होश तुझे क्यों आए न ll
जोड़ जोड़ भर लिए खज़ाने, साथ गई एक पाई न l
भवसागर के अन्दर तेरी, नईया रही है डोल रे…
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

जिसको समझे यह जग अपना, वो एक दर्शन मेला ll
अंत काल पछताएगा, जब जाएगा तूँ अकेला l
सुंदर तन पे दाग़ लगाया, मैली चादर ओढ़ रे…
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

लाख़ चौरासी के चक्र में, काहे भटक रहा है ll
भले बुरे कर्मो की फाँसी, जिस पे लटक रहा है l
साँस साँस से राम सुमिर ले, लागे न कोई मोल रे…
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

ये माया है आनी जानी, ये जग झूठा सपना ll
मात पिता सुत बंधु प्यारे, कोई नहीं है अपना l
चार भाई श्मशान में जाकर, देंगे अकेला छोड़ रे…
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

चला चली का मेला है यहाँ, कोई आए कोई जाए ll
राजा रँक यहाँ न कोई, ये जग एक सराय l
न जाने किस वक्त कहाँ पर, काल का वाज़े ढोल रे….
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

मुठी बांधे आया जगत में, हाथ पसारे जाएगा ll
कोठी बंगले महल खज़ाना, यहीं धरा रह जाएगा l
गहरी नींद में सोने वाले, अब तो आँखे खोल रे….
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

एक पतंग की तरह रे प्राणी, तेरी अमर कहानी ll
पॉँच लुटेरे लूट रहे हैं, तेरी ये जिंदगानी l
आसमान पे उड़ने वाले, कट जाएगी डोर रे….
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

पाँच तत्व का बना यह पिंज़रा, जिसका नाम है काया ll
पँछी रैन बसेरा करता, देकर श्वास किराया l
एक दिन ख़ाली करना पड़ेगा, यह पिंज़रा अनमोल रे…
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

क्या तूँ लेने आया जगत में, क्या तूँ लेकर जाएगा ll
दुर्लभ मानुष जन्म रे बंदे, फ़ेर नहीं तूँ पाएगा l
अभिमान में अँधा होकर, काहे मचावे शोर रे…
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

बनके हँस तूँ मोती चुग ले, जीवन सफ़ल बना ले ll
राम नाम अमृत फ़ल ख़ाकर, अपना आप बचा ले l
लाख चौरासी चक्र में क्यों, फिरता डाँवा डोल रे…
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

माँ के गर्भ में लटक रहा था, वादा खूब किया रे ll
विषय विकारों की आँधी में, वादा भूल गया रे l
जकड़ ज़ंजीरों से ले जाए, बन के जाए चोर रे…
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

कर्म वही के अन्दर चाहे, हेराफ़ेरी कर ले ll
दुनियाँ भर के खाते चाहे, अपने नाम तूँ कर ले l
सच्चे मालिक के आगे तूँ , कुछ न सकेगा बोल रे…
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

देख दिए की भांति तेरी, बाती बुझ जाएगी ll
काल तूफाँ के आगे तेरी, हस्ती मिट जाएगी l
रहा न कुछ भी बस में तेरे, प्रभु से नाता जोड़ रे…
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

अब तो नाम सिमर ले प्राणी, समय यह बीत रहा है ll
न कोई बन्धु सखा है तेरा, न कोई मीत रहा है l
दूर किनारा सब ने किया है, दिया अकेला छोड़ रे…
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

भाग-2

सीता राम सीता राम, सीता राम बोल,
राधे श्याम राधे श्याम, राधे श्याम बोल ll
काहे प्राणी भटक रहा है, जीवन है अनमोल रे…
सीता राम सीता राम, सीता राम बोल,
राधे श्याम राधे श्याम, राधे श्याम बोल ll

काहे तन का गर्व करे है, ये एक दिन जल जाएगा ll
जैसे जल से गले रे कागज़, ऐसे तूँ ग़ल जाएगा l
गुरु ज्ञान को गले लगा क्यों, माया रहा बटोर रे…
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

अब तो नेकी कर ले बंदे, साथ तेरे जो जाएगी ll
ये मतलब की दुनियाँ तेरा, कब तक साथ निभाएगी l
कुछ तो धर्म कमा ले मूर्ख, डायन बदी को छोड़ रे…
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

तुझसे वृक्ष भले है बंदे, देते है जो छाया ll
पँछी जिसकी गोद में सोते, फ़ल दे पुण्य कमाया l
सबको सुख देते हैं भईया, लेते न कोई मोल रे…
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

जीवन तो एक नदिया है और, सुख दुःख दो है किनारे ll
बहती तेज़ धारा के अन्दर, तुझ को अब जीना रे l
राम नाम जहाज़ में चढ़ जा, विरथा यूँ मत डोल रे…
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

जिस रंग में श्री राम जी राखे, उसी में रहना चाहिए ll
जो कुछ तुझको दिया है उसमें, शुक्र मनाना चाहिए l
ऊपर देखें दुःख घनेरा, नीचे सुख की थोड़ रे…
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

धन्ना जाट था भक्त निराला, पत्थरों को भोग लगाए ll
तूँ खाए तो मैं भी खाऊँ, शाम सवेरे गाए l
एक सहारा तेरा दाता, तेरे बिन न होर रे…
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

नामदेव था भक्त निराला, राम नाम गुण गाता ll
जो कुछ दिया प्रभु ने उसको, उसी में शुक्र मनाता l
स्वान बन भगवान थे आए, दर्श किया अनमोल रे…
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

दुशासन ने द्रोपदी की, खींची सभा में साड़ी ll
चरणों में बस ध्यान लगाकर, द्रोपदी ये पुकारी l
लाज बचाओ कान्हा मेरी, बार बार ये बोल रे…
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

दीन दुखी का दुःख अपना ले, होगी नईया पार रे ll
जो इनको तड़पाएगा, ये देंगे नींव उखाड़ रे l
कभी संभल न पाएगा तूँ, करले बात पे गौर रे…
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

दुखिया तेरे पास खड़ा और, पर तूने मौज़ उड़ाई रे ll
भूखा प्यासा पड़ा पड़ौसी, न उसकी भूख मिटाई रे l
जीवन ख़ुशियों से भर जाए, उसके आंसू पोंछ रे…
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

पाँच तत्व की बनी कोठरिया, यह एक दिन गिर जाएगी ll
कागज़ की है नईया तेरी, पानी में बह जाएगी l
अकड़ अकड़ पग धरे धरा पर, चलता मूँछ मरोड़ रे…
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

जाग मुसाफ़िर भोर भई क्यों, सोता चादर तान रे ll
काल कुठार है होकर आया, क्यों होता अनजान रे l
काल बलि से बच न पाए, चाहे लगा ले ज़ोर रे…
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

दुर्लभ मानुष जन्म को पाना, बच्चों का कोई ख़ेल नहीं ll
जन्म जन्म के शुभ कर्मों का, होता जब तक मेल नहीं l
उत्तम कर्म कमाई कर ले, छल कपट को छोड़ रे…
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

सोने में तो रात गँवाई, दिन भर करता पाप रहा ll
इसी तरह बर्बाद रे बंदे, करता अपना आप रहा l
बादल बनकर काल गरजता, छाई घटा घनघोर रे…
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

मेरे राम हैं बड़े दयालु, सब कुछ देते जाते ll
छोटे बड़े का भेद न करते, सब की भूख मिटाते l
शर्मा पी ले प्रेम का प्याला, राम नाम रस घोल रे…
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

बलवंत तूँ गुण गा ले प्रभु का, मुश्किल हल हो जाएगी ll
झोली फैला देख सुरेंद्र, ख़ुशियों से भर जाएगी l
किसी तरह की कमी न होगी, हो जाएगी मौज़ रे…
सीता राम सीता राम सीता राम बोल…..

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