कृष्ण की दीवानी बनकर मीरा ने घर छोड़ दिया

कृष्ण की दीवानी बनकर मीरा ने घर छोड़ दिया
इक राजा की बेटी ने गिर धर से नाता जोड़ लिया ll

नाचे गाए मीरा बाई लेकर मन का इक तारा
पग में घुंघरू गले में माला भेष योगन का है धारा
राणा कुल की आन-बान को मीरा जी ने तोड़ दिया,
कृष्ण की दीवानी बनकर मीरा ने घर छोड़ दिया।।

भक्ति ज्ञान का था इक तारा हर घुँघरू में नाद भरा
हरि गायण में वसे कन्हैया भक्ति भाव में स्वाद भरा
ज्योति से ज्योत मिला दी उसने सबसे नाता तोड़ लिया
कृष्ण की दीवानी बनकर मीरा ने घर छोड़ दिया।।

सास कहे कुल नाशी मीरा लगे गले में फाँसी रे
कैसे जीना, होगा तेरा जग करता है हाँसी रे
मन के पिया की बनी योगनियाँ
और तन के पिया को छोड़ दिया,
कृष्ण की दीवानी बनकर मीरा ने घर छोड़ दिया।।

साँप पिटारा राणा भेजा हार मौत के शुलों का
हँस करके मीरा ने पहना हार बन गया फूलों का
प्रेम दीवानी, मीरा देखो मोह का बंधन तोड़ दिया,
कृष्ण की दीवानी बनकर मीरा ने घर छोड़ दिया।।

पी गई मीरा बाई देखो राणा के विष का प्याला
कौन बिगाड़ सका है उसका जिसका गिरधर रखवाला
गिरधर के रंग में मीरा ने जग से नाता तोड़ लिया,
कृष्ण की दीवानी बनकर मीरा ने घर छोड़ दिया।।

श्याम शरण में जो कोई जाए वो श्याम का बन जाता
भक्त दयालु भजन भाव में मीरा के ही गुण गाता
भव सागर से तर गई मीरा जग से बंधन तोड़ दिया,
कृष्ण की दीवानी बनकर मीरा ने घर छोड़ दिया।।

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