गणेश गायत्री मंत्र

ॐ एकदंताय विद्यमहे, वक्रतुंडाय धीमहि, तन्नो दंति प्रचोदयात्।।

108 जाप

अर्थ:
हम उस एक दन्त भगवान गणेश की प्रार्थना करते हैं, जो सर्वव्यापी है।
हम ध्यान और प्रार्थना करते है उस हाथी के आकार वाले भगवान से बुद्धि के लिए।
हम, ज्ञान के साथ अपने दिमाग को रोशन करने के लिए एकल दन्त भगवान गणेश के सामने झुकते हैं।

गणेश गायत्री मंत्र – सुरेश वाडेकर

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