चिन्तन हो सदा मेरे मन में तेरा

चिन्तन हो सदा मेरे मन में तेरा,
चरणों में तेरे मेरा ध्यान रहे,
चाहे दु:ख में रहूँ, चाहे सुख में रहूँ,
होंठो पै सदा तेरा नाम रहे,
चिंतन हो सदा मेरे मन में तेरा।।

हे विपिन-बिहारी मुरलीधर,
है कौन मेरा इस दुनियाँ में,
अपना लो मुझे या ठुकरा दो,
चरणों से तेरे मुझे काम रहे,
चिंतन हो सदा मेरे मन में तेरा।।

हे राधा माधव युगल तुम्हें,
इक पल के लिए भी ना भूलूँ,
बस जनम-जनम हे कृष्ण तेरे,
चरणों में मेरा विश्राम रहे,
चिंतन हो सदा मेरे मन में तेरा।।

चितचोर हो तुम श्रीराधा के,
व्रजवनिता के ब्रज-ग्वालों के,
तेरे चरणों में ‘प्रीति’ की प्रीति रहे,
अरु भक्ति सदा निष्काम रहे,
चिंतन हो सदा मेरे मन में तेरा।।

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