चुप क्यों है बोल दे मोहन

क्यों सताए मुझे क्यों रुलाये मुझे
इतना तो बोल दे मोहन
चुप क्यों है बोल दे मोहन
क्यों सताए मुझे क्यों रुलाये मुझे

इतना बेदर्द क्यों हो गया है तू
अब तू बोल ज़रा किस्से जाके कहूं
इतना दर्द मिला मैं सहन कैसे
अब तो सुन भी ले मोहन
चुप क्यों है बोल दे मोहन ।।

सबके तो सामने मैं तो हंसती रही
आंसू आँखों में अपने छिपाती रही
अब तो आंसू मेरे रुके ना रुके
इनको तू देख ले मोहन
चुप क्यों है बोल दे मोहन।।

हर किसी से जिसे मैं छिपाती रही
पर सांवरिया तुझको बताती रही
अब शिखा ने जो दुःख सहे सांवरे
उसको तू जान ले मोहन
चुप क्यों है बोल दे मोहन।।

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