जय जय हो हनुमान गोसाई जय जय हो मेरे रघुराइ

आओ भक्तो हनुमान बजरंग बलि की कथा सुनाये
महावीर बजरंगबली ही
शिव शंकर का अंश बताये
देवो की महिमा को भक्तो
कोई यहाँ पे समझ न पाए

सृष्टि की रचना की खातिर
लीला ये हमको अपनी दिखाए
राम कृष्णा हनुमान
अपनी बुद्धि बल से तोड़े
दानव का ये अभिमान
तीनो लोक की सभी देविया
जो भी धर्म की हानि करते

जय जय हो हनुमान गोसाई
जय जय हो मेरे रघुराइ

लीला ये हमको दिखाए
अपनी बुद्धि बल से तोड़े
तीनो लोक के सभी देविया
उनको पल में मार मिटाये
जय जय हो हनुमान गोसाई
जय जय हो मेरे रघुराइ

शिव शंकर से जुडी हुए
ये हनुमान की ये कथा सुनाये
एक दिन शिव तप से जागे
माता सती से वो फरमाए
सुनो प्रिये मेरे मन में एक
आया है विचार है बताये
हाथ जोड़ कर बोली सती जी
क्या संकल्प है हमें सुनाये
बोले शिवजी जिनका ध्यान लागू बरम बार
भगवन भूमि पर लेने चले है वो अवतार
करू वह पर उनकी सेवा
मन में आया है यही विचार
दानवो के अत्याचार से
मुक्ति पायेगा संसार

जय जय हो हनुमान गोसाई
जय जय हो मेरे रघुराइ

बोले सती शिव शंकर जी से
आप मेरा संकोच मिटाये
जिस रावण को मरना चाहे
वो तो आपका भक्त कहाये
उसने अपने शीश काट के
प्रभु आपको दिए चढ़ाये
कैसे उनको मारोगे तुम
आप की बात साझ ना आये
उसने जब दस शीश चढ़ाये
ग्यारहवे अंश को दिया भुलाये
उसी अंश से जन्म मैं लूंगा
हनुमान रुपी बतलाये
वायुरूप के द्वारा
अंजनी के घर लूंगा अवतार
निश्चय मैंने करलिया मन में
सुनो सती मेरा ये विचार
जय जय हो हनुमान गोसाई
जय जय हो मेरे रघुराइ

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