जीवन की घाटी में सोना है माटी

जीवन की घाटी में सोना है माटी,
अगर मन ये प्रीतम न गाये मधुर गीतम रामम रामम ,
जीवन की घाटी में सोना है माटी
अगर मन ये प्रीतम न गाये मधुर गीतम,रामम रामम।।

राम जय जय राम जय जय राम,
राम जय जय राम जय जय राम,
राम जय जय राम जय जय राम,
राम जय जय राम जय जय राम,
राम जय जय राम जय जय राम,
राम जय जय राम जय जय राम,
राम जय जय राम जय जय राम।।

राम जय जय राम जय जय राम,
जीवन की घाटी में सोना है माटी,
अगर मन ये प्रीतम न गाये मधुर गीतम रामम रामम,
राम जय जय राम जय जय राम,
राम जय जय राम जय जय राम,
राम जय जय राम जय जय राम,
राम जय जय राम जय जय राम,
राम जय जय राम जय जय राम,
राम जय जय राम जय जय राम,
राम जय जय राम जय जय राम,
राम जय जय राम जय जय राम,
अविवेकी मन ये स्वयं में ही उलझा,
काँटों को इसने सरा फूल समझा,
आँखों के होते हुये खाये ठोकर,
दुःख में प्रभु तुम को दिखलाये रोकर,
प्रीती में तेरी न आँखे हुयी नम,
मगर मन ये प्रीतम भरे भक्ति का दम रामम रामम।।

राम जय जय राम जय जय राम,
राम जय जय राम जय जय राम,
राम जय जय राम जय जय राम,
राम जय जय राम जय जय राम,
राम जय जय राम जय जय राम,
राम जय जय राम जय जय राम,
राम जय जय राम जय जय राम,
राम जय जय राम जय जय राम।।

सपनों के झूले में मन कैसा झूला,
सुख रूप अपने प्रभु को ही भुला,
माया के तूफ़ान तिनके सा जीवन,
मज़बूर उड़ता रहा है ये हर क्षण,
सूरज के बिन कैसे कट पायेगा तम,
मगर मन ये प्रीतम करे व्यर्थ ही श्रम रामम रामम।।

राम जय जय राम जय जय राम,
राम जय जय राम जय जय राम,
राम जय जय राम जय जय राम,
राम जय जय राम जय जय राम,
राम जय जय राम जय जय राम,
राम जय जय राम जय जय राम,
राम जय जय राम जय जय राम,
राम जय जय राम जय जय राम।।

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