तू कैसा है नादान तू ढोये मौत का सामान ये दुनिया धोखा है

किताबे खूब मिलती है मगर चिंतन नहीं मिलता,
जिसे है मौत की है चाहत उसे जीवन सदा मिलता,
बावरे कौन है जग में जिसे सब कुछ दिया रब ने,
किसी को धन नहीं मिलता किसी को धन नहीं मिलता।।

तू कैसा है नादान तू ढोये मौत का सामान,
ये दुनिया धोखा है, ये दुनिया धोखा है।।

यहाँ खवाबो में सब जीते,
माया का हालाहल पीते,
जिसे समझे अमृत पान,
ये दुनिया धोखा है, ये दुनिया धोखा है।।

यहाँ आशा और निराशा,
मेरा जीवन पल पल प्यासा,
तुझे किसका है अभिमान,
ये दुनिया धोखा है, ये दुनिया धोखा है।।

यहाँ कोई नहीं है अपना,
धन दौलत का ये सपना,
है कुछ दिन का मेहमान,
ये दुनिया धोखा है, ये दुनिया धोखा है।।

सेवा जीवन की कहानी,
हकीकत जिसने जानी,
वो कहलाया भगवन,
ये दुनिया धोखा है, ये दुनिया धोखा है।।

तू कैसा है नादान तू ढोये मौत का सामान,
ये दुनिया धोखा है ये दुनिया धोखा है।।

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