तेरी चटक चुनरिया ना ओढू मैं रसिया

तेरी चटक चुनरिया ना ओढू मैं रसिया
लायी दे जलेबी जा में रस टपके
जेठ का महीना रंग जले रे मोरा गोरा गोरा
दिया दिया रे पीछे पडो रे अलीगढ का छोरा ।।

तेरी चटक चुनरिया ना ओढू मैं रसिया
लायी दे चुनरी जा में रस टपके।।

लेचल सिनेमा पैदल चालू ना मैं
जल्दी माँगा हौंडा सिटी गाडी
ऐसा दी जे वाला ढोल बजादे
जा पे उठ उठ मटके ।।

मुझसे अड़े मत क्यों तू करे रे फैलाने ढिमका
आवे पसीना जल्दी जल्दी पीला ठंडी ठंडी लिम्का।।

तेरी चटक चुनरिया ना ओढू मैं रसिया
लायी दे जलेबी जा में रस टपके।।

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