धूनी वाले दादाजी ओ भैया शिव अवतारी हैं

गुरु मूरत मुख चन्द्रमा सेवक नैन चकोर,
अष्ट पहर निरखत रहो गुरु चरणन की ओर।।

धूनी वाले दादाजी ओ भैया शिव अवतारी हैं,
शिव अवतारी हैं जगत के पालनहारी हैं,
धूनी वाले दादाजी ओ भैया शिव अवतारी हैं।।

जब जब पाप बढ़ा धरती पर भगवन ने अवतार लिया,
भक्तों का कल्याण किया जग का भी उद्धार किया,
लीला रचाई दादा जी ने महिमा उनकी भारी है,
धूनी वाले दादाजी ओ भैया शिव अवतारी हैं।।

मात नर्मदे की परिक्रमा गुरु आरती करते थे,
श्याम सवेरे नित उठ भैया माँ को प्रणाम करते थे,
वो तो सबसे प्यारे हैं वो तो सबसे प्यारे हैं
धूनी वाले दादाजी ओ भैया शिव अवतारी हैं।।

माई नर्मदे के किनारे भैया चमत्कार हुआ,
पांच बरस बाल रूप में दादाजी अवतार हुआ,
अंगुली पकड़ अपने गुरू की उन्होंने लीला दिखाई है,
धूनी वाले दादाजी ओ भैया शिव अवतारी हैं।।

एक दिन दादाजी हमारे जल में डुबकी लगाईं है,
साधू संत हाथ जोड़कर जल में समाधि लगाईं है,
पंद्रह दिन बाहर नहीं आए वो तो अन्तर्यामी हैं,
जल में समाधि लगाईं है जल में समाधि लगाईं है,
धूनी वाले दादाजी ओ भैया शिव अवतारी हैं।।

Leave a Reply