पार्वती पंचक स्तोत्रं – अविनाश कर्ण

धरा धरेन्द्र नन्दिनी शशाहक मौली संगिनी
सुरेश शक्ति वर्धिनी नितान्त कान्ति कामिनी
निशाचो द्रमदिनी त्रिशूलधारनी रिजी
मनोरथ
विदारिणी शिव तनो तु पार्वती
प्रकृष्ट सृष्टि कारिका प्रचण्ड नृत्पनतिर्क
विनाक पाणिधारिका गिरिश श्रृंगमा लिका
समस्तयक्त पालिका पीयूषपूर्ण वर्षिका
कुभाग्य रेख मर्जिका शिवं तनोतु पार्वती
तपश्चरी कुमारिका जगत्परा प्रहेलिका
विशुद्धमानस साधिका स
धास रित्प्रवाहिका
प्रयत्न पसपोषिका सदार्धिमाग्य तोषिका
शनि ग्रहादित र्जिका शिवं तनोतु पार्वती
शुभड़करी शिवं करी विमाकरी निशंकरी
नमरचरी धरा समस्त्रसृष्टि संचारी
तमोहरी मनोहरी मृगाड़ कमौलि सुन्दरी
सदो ग्रतापस
ञचरी शिवं तनोतु
पार्वती
पार्वती सम्भुखे नित्यमधीते या कुमारिका

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