माँ को जो भी पुकारेगा मन से

माँ को जो भी पुकारेगा मन से,
दौड़ी आयेंगी मैया जतन से।।

सबका जीवन संवारेगी माता ,
माता होती कभी न कुमाता,
उनका पूजन करो तन ओ मन से,
दौड़ी आयेंगी मैया जतन से।।

वो हैं माता दुखी दीन जन की,
आशा पूरी करें सबके मन की,
उनको करना न ओझल नयन से,
दौड़ी आयेंगी मैया जतन से।।

ध्यानू ने सच्चे मन से पुकारा,
शीश घोड़े का जोड़ा दोबारा,
राजेन्द्र उनको पुकारो लगन से,
दौड़ी आयेंगी मैया जतन से।।

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