माँ बेटे का भजन ।। आरे तु चाल चले से काग की रे मनै हंस समझ के पाला ।। सरोज घणघस ।।



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टेक:- आरे तु चाल चले से काग की रे मनै हंस समझ के पाला ।।

1. मनै त बाग लगाया बड़ा नामी, बोए आम कंडाई रे जामी, हाँ रे या शक्ल बिगड़ गई बाग की रे एक रह गया पेड़ निराला ।।

2. मनै त जाए हँसा के बच्चे, चुग चुग के मोती दिए सच्चे, फेर भी रह गए मति के कच्चे, हाँ रे मन पता नहीं था इस बात का तू भितरले का काला ।।

3. मनै रे दूध पिलाया प्यारा, बेरा ना किस तरियां होग्या रे खारा, ओर मनै पता नहीं था इस बात का, रे मेरा मुँह करवा दिया काला ।।

4. काला नाग बम्बी में बड़गा, पकड़न लागी जड़ के लिकड़गा, आरे तू बड़ बम्बी में बैठ गया, रे मनै बण गया डसने आला ।।

5. फर दे आजा फर दे उडजा, घोड़ा छोड़ गधे पे रे चड़गा, आरे मनै पता नहीं था इस बात का, रे ना तो गुरुवां की फेरती माला ।।

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