माता दुर्गा रानी का जयकारा लागले

भक्ति भाव से बड़े चाव से
माता दुर्गा रानी का जयकारा लागले
तेरे बिगड़े काम बनेंगे
मैया का जब ध्यान धरेंगे दिल से ध्या ले
मन से अम्बे का जयकारा लगाले ।।

जो मन से इससे ध्याये
माँ उसकी बिगड़ी बनाये।।

जो शरणागत आये
उसपे माता मेहर कर जाए
तू भी ध्यान लागले माँ का
फहरादे तू लाल पताका
संकट सर से है टल जाए
ऐसा चमत्कार कृपा का।।

शरण में आके चरणों में आके
श्रद्धा भाव से तू अपना सर झुका ले
तेरे बिगड़े काम बनेंगे
मैया का जब ध्यान धरेंगे
दिल से ध्या ले
मन से आंबे का जयकारा लागले ।।

ऊंची पहाड़ी वाली मैया
आदि शक्ति शाली
धाम से माँ वैष्णो के कोई जाता नहीं है खाली।।

तू भी माँ की भेट को गाले
मैया रानी को हर्षाली
भाव से करले माँ का वंदन
इससे शुभ शुभ वर तो पाले ।।

जो भी भक्त है वो शशक्त है
मैया रानी गिरने से पहले संभाले
तेरे बिगड़े काम बनेंगे
मैया का जब ध्यान धरेंगे
मन से अम्बे का जैकारा लागले
भाव से करले माँ का वंदन ।।

जिसने किया है जगराता उसके घर प्रगटी है माता
काल से मुक्ति मिली है सोया भाग्य जाग जाता माता ।।

माँ की महिमा बड़ी मतवाली
भव से भक्तो को टालने वाली
जिसने माँ का ध्यान लगाया
उसकी चमकी किश्मत काली।।

ली न हुए जो माँ भक्ति में
उनके दुःख संकट मैया रानी ने ताले
तेरे बिगड़े काम बनेंगे
मैया का जब ध्यान धरेंगे
दिल से ध्याले
मन से आंबे का जयकारा लागले ।।

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