मेरे बाबा तुझे चढ़ गया कैसा खुमार जो ऐसे छम छम नाच रहा

मेरे बाबा तुझे चढ़ गया कैसा खुमार
जो ऐसे छम छम नाच रहा।।

चड़ा है तुझपे किस का रंग जो बदला तेरा ऐसा रंग,
सिन्धुरी रंग से तू कर बैठा श्रृंगार
जो ऐसे छम छम नाच रहा।।

ये लटके झटके तेरे भरपूर
हुआ तू किस मस्ती में चूर
हो सोटे वाले तुझे हो गया किस से प्यार
जो ऐसे छम छम नाच रहा।।

दीवाने हो गया तेरा नाम तेरे मन बस गए सीता राम
राम के रसिया तुझे प्रेम करे संसार
जो ऐसे छम छम नाच रहा।।

मेहर भी देखे तेरी और चले न तुझपे मेरा जोर,
अरे बजरंगी गया बिट्टू सरोहा भी हार
जो ऐसे छम छम नाच रहा।।

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