मैंने जिससे प्रीत लगाई मुरली मनोहर

मैंने जिससे प्रीत लगाई मुरली मनोहर,
वो कृष्ण कन्हाई ऐसा वो साँवरा,
जाने मन को मोहना मैंने जिससे प्रीत लगाई।।

इक दिन मेरे सपनों में आया,
आकर बोलै क्यों भरमाया,
भूल जा सारी जग की माया,
नश्वर है ये तेरी काया
बन जा तू मेरा बस मेरा,
कर गया बाँवरा सपना वो सोहाना।।

अब तो ऐसी लगन है लागी,
सुध बुध मैंने सब बिसरा दी,
उसके बिना ना कुछ भी भावे,
हर पल टीटू याद सतावे,
मिल जा हुआ तेरा बस तेरा,
एक बार मिल ज़रा ये प्रीत ना तौड़ना,
मैंने जिससे प्रीत लगाई मुरली मनोहर,
वो कृष्ण कन्हाई ऐसा वो साँवरा,
जाने मन को मोहना,
मैंने जिससे प्रीत लगाई।।

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