मैं तुम्हे कभी तो पाऊँगी

मैं तुम्हे कभी तो पाऊँगी,
मैं तुम्हे कभी तो पाऊँगी,
मेरे जन्मों के साथी सजन,
मेरे जन्मों के साथी सजन,
मै तुम्हे कभी तो पाऊँगी।।

गोविन्द मैं तुम्हे कभी तो पाऊँगी,
मेरे जन्मों के साथी सजन।।

पग नूपुर की झंकारो से,
भावो भरे मधुर इशारों से,
साँसों के पंखो से उड़कर,
तारों तक खोज लगाउंगी,
मै तुम्हे कभी तो पाऊँगी।।

गोविन्द मैं तुम्हे कभी तो पाऊँगी,
मेरे जन्मों के साथी सजन।।

योगन का भेष बनाकर के,
इस जग से आँख बचाकर के,
मन के इकतारे पे साजन,
मैं गीत विरह के गाऊँगी,
मै तुम्हे कभी तो पाऊँगी।।

गोविन्द मैं तुम्हे कभी तो पाऊँगी,
मेरे जन्मों के साथी सजन।।

तुम छुपना राधा के मन में,
मधुवन की रंगीली कुंजन में,
मैं बन कर ललिता की वीणा,
थिर्को पर तुम्हे नचाउंगी,
मै तुम्हे कभी तो पाऊँगी।।

गोविन्द मैं तुम्हे कभी तो पाऊँगी,
मेरे जन्मों के साथी सजन।।

मैं तुम्हे कभी तो पाऊँगी,
मेरे जन्मों के साथी सजन,
मै तुम्हे कभी तो पाऊँगी।।

गोविन्द मैं तुम्हे कभी तो पाऊँगी,
मेरे जन्मों के साथी सजन।।

सिंगर – विनोद अग्रवाल जी।

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