मैं मैं छोड़ माँ माँ बोल

मैं मैं छोड़, माँ माँ बोल,
ये नाम, बड़ा अनमोल,
मैं मैं छोड़, माँ माँ बोल।।

ये मैंने किया, वो मैंने किया,
क्या तूने किया, माँ जानती है,
तूँ क्या है तेरी, औक़ात है क्या,
तेरी रग रग को, पहचानती है।।
अब भी वक़्त है, संभल जा वार्ना,
खुल जाएगी तेरी पोल,
मैं मैं छोड़, माँ माँ बोल।।

रावण भी, मैं मैं करता था,
दस शीश कटे, वो मारा गया,
हिरण्य कश्यप को, जांघो पे,
रख पेट था, उसका फाड़ा गया,
जिसने खुद पर, अभिमान किया,
फिर उसका हो गया बिस्तर गोल,
मैं मैं छोड़, माँ माँ बोल।।

सम्मान मान, सब माँ का है,
ये जीवन भी तो, माँ ने दिया,
अपना तो इसमें, कुछ भी नहीं,
सब माँ ने दिया, सब माँ ने दिया,
साँसों का ये, पंछीं इक दिन,
उड़ जायेगा तन का पिंजरा खोल,
मैं मैं छोड़, माँ माँ बोल।।

यह बात, बहुत ही सच्ची है,
क्यों, तेरी समझ में आती नहीं,
जिस घर में, माँ की ज्योत जगे,
वहाँ, बुरी नज़र कभी जाती नहीं,
चंचल जो, माँ के बच्चे हैं
नहीं होते कभी वो डाँवाडोल,
मैं मैं छोड़, माँ माँ बोल,
ये नाम, बड़ा अनमोल,
मैं मैं छोड़, माँ माँ बोल।।

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