मैं हूँ पागल श्याम दीवानी

ना मैं राधा ना मैं मीरा ना मैं सुदामा जैसी हूँ
मैं हूँ पागल श्याम दीवानी
मत पूछो मैं कैसी हूँ मत पूछो मैं कैसी हूँ।।

कौन हूँ मैं और क्या है दुनिया
मुझे रहा अब होश नहीं
मैं पगली हूँ श्याम नाम की
मेरा कोई दोष नहीं
मेरा कोई दोष नहीं ।।

कोई मुझको कुछ भी बोले
मैं ऐसी हूँ या वैसी हूँ
मैं हूँ पागल श्याम दीवानी
मत पूछो मैं कैसी हूँ मत पूछो मैं कैसी हूँ।।

ना मैं राधा ना मैं मीरा ना मैं सुदामा जैसी हूँ
मैं हूँ पागल श्याम दीवानी
मत पूछो मैं कैसी हूँ मत पूछो मैं कैसी हूँ।।

श्याम नाम के कीर्तन से मन की तिजोरी भरनी है
डूब के मैंने श्याम सुधा में चाहत पूरी कर्ली है
जैसे चाहे श्याम हमारा हां मैं बिलकुल वैसी हूँ
मैं हूँ पागल श्याम दीवानी
मत पूछो मैं कैसी हूँ मत पूछो मैं कैसी हूँ।।

ना मैं राधा ना मैं मीरा ना मैं सुदामा जैसी हूँ
मैं हूँ पागल श्याम दीवानी
मत पूछो मैं कैसी हूँ मत पूछो मैं कैसी हूँ।।

श्याम के रंग में भीग चुकी हूँ
अब कोई नहीं अब चाह नहीं
सांस चले या थाम जाए
मुझे अब कोई परवाह नहीं।।

श्याम सरोवर में मिलने को
बहती नदिया जैसी हूँ
मैं हूँ पागल श्याम दीवानी
मत पूछो मैं कैसी हूँ मत पूछो मैं कैसी हूँ।।

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