ये प्रेम सदा भरपूर रहे हनुमान तुम्हारे चरणो में

ये प्रेम सदा भरपूर रहे
हनुमान तुम्हारे चरणो में
भगवान तुम्हारे चरणो में
ये अर्ज मेरी मंजूर रहे
हनुमान तुम्हारे चरणों मे।।

ये प्रेम सदा भरपूर रहे
हनुमान तुम्हारे चरणो में।।

निज जीवन की डोर सौंप दी
हाथ मे तेरे इसको संभालो
दास पड़ा चरणों मे तेरे
करदो कृपा ओर इसको उबारो
संसार मे देखा सार नही
बस सार तुम्हारे चरणों मे

रूप तुम्हारा आंखों में ऐसे
रम जाए ये दिल की दुआ है
भजन में ऐसे खोया रहूँ मैं
पूछे जमाना मुझे क्या हुआ है
मेरा जो भी निज तन मन धन
अर्पण है तुम्हारे चरणों में।।

ये प्रेम सदा भरपूर रहे
हनुमान तुम्हारे चरणो में।।

वचन जो मेरे मुख से निकले
दिल ना किसी का मैं ना दुखाऊं
कर्म करूँ मैं ऐसे दयालु
निर्बल को मैं कभी ना सताऊं
मेरा जीवन मानव सेवा में
मन ध्यान तुम्हारे चरणों में।।

ये प्रेम सदा भरपूर रहे
हनुमान तुम्हारे चरणो में।।

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