विपदा हरो मेरे श्याम रे घनश्याम रे

तुम्हे मानु करतार कहे द्रोपदी पुकार,
मैं तो आयी तेरे द्वार,
विपदा हरो मेरे श्याम रे घनश्याम रे।।

पति गए है तपस्या करने,
बिन पत्नी अकेले दुःख भरने,
पाने देवो से हथियार,
करने दुष्टो का संहार,
मेरे कृष्णा मुरार चिंता हरो,
मेरे श्याम रे घनश्याम रे,
विपदा हरो मेरे श्याम रे घनश्याम रे।।

नारी का हिट होता वर में,
मैं कैसे रहूँ बैठी घर में,
मुझपे संकट ये अपार,
युक्ति करो कुछ विचार तुमसे करती हूँ गुहार,
धीर धाराओं मेरे श्याम रे घनश्याम रे,
विपदा हरो मेरे श्याम रे घनश्याम रे।।

मुझको कोई उपाए बताओ,
मेरी दुविधा दूर भगाओ,
तुम हो बड़े ही लीला धार,
भैया नारायण अवतार,
भाव से करदो मुझको पार,
झोली भरो मेरे श्याम रे घनश्याम रे,
विपदा हरो मेरे श्याम रे घनश्याम रे।।

नहीं भूलता है बहना को भाई,
तूने सुध भी मेरी बिसराई,
भूला बहना का प्यार सारे जग के पालन हार,
कहे द्रोपदी पुकार,
विपदा हरो मेरे श्याम रे घनश्याम रे।।

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