श्याम तेरी जब बंशी बोले सब जग हुआ दीवाना

श्याम तेरी जब बंशी बोले,
श्याम तेरी जब बंशी बोले,सब जग हुआ दीवाना
मेरा कौन ठिकाना,मेरा कौन ठिकाना।।

श्याम तेरी जब बंशी बोले,सब जग हुआ दीवाना
मेरा कौन ठिकाना,मेरा कौन ठिकाना।।

जहाँ बिताए बचपन और जहाँ साथ साथ मे खेला
उसको भी न समझ मे आये गिरवर तेरी लीला,
युग युग से जो प्रेम में डूबा उसका प्यास बुझे न।।

जहाँ बिताए बचपन और जहाँ साथ साथ मे खेला
उसको भी न समझ मे आये गिरवर तेरी लीला,
मुझसे जो प्रेम में डूबे उसकी प्यास ना बुझे।।

श्याम तेरी जब बंशी बोले,सब जग हुआ दीवाना
मेरा कौन ठिकाना,मेरा कौन ठिकाना।।

देती है आवाज़ तुझे अब भी यशोदा मैं,
लेती है छुप छुप के सखिया तेरी आज बलैया,
राधा नही दीवानी सारे गोकुल हुए दीवाना
मेरा कौन ठिकाना,मेरा कौन ठिकाना।।

श्याम तेरी जब बंशी बोले,सब जग हुआ दीवाना
मेरा कौन ठिकाना,मेरा कौन ठिकाना।।

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