श्री हनुमान अमृतवाणी अवधी

जय हनुमान वीर बलवाना
शूर वीर चतुर सुजाना
राम रतन धन तुम्ही ने पाए
सियाही राम तुम ह्रदय बसायो ।।

पवन वेग है गति तुम्हारी
रूप धार विकराल विशाला
पवन पुत्र अंजनी के लाला।।

अति बलवान चतुर और अति ग्यानी
तीनो लोको के सैलानी
चारो युग प्रताप तुम्हारा
हरी पर सिद्द जगत उजियारा।।

सुरसा से भाई भेट तुम्हारी
कइके छल बल सब वो हारी
बल बुद्धि में जग तुम्हे चीन्हा
दे आशीष विदा तुम्हे कीना।।

तुम सैम कोहु ना दयावान
संतान के कष्ट निदाना
भक्तन के तुम अति हितकारी
पल पल बरसे कृपा तुम्हारी।।

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