सारे जग को छोड़ बाबा आया तेरे द्वार

सारे जग को छोड़ बाबा आया तेरे द्वार
मेरी डूबी नैया का तू ही पतवार
गल वैजयंती माला है और लंगोटा है लाल
अब तो जल्दी आजा बाबा आया तेरे द्वार।।

सारी दुनिया को ठुकराया हु तेरी ही आस लेके आया हु
चारो और छाया अँधेरा है तेरे द्वारे में सिर झुकाया हु
नैया है बीच भवर में मुझे रास्ता दिखा
अब तो जल्दी आजा कौन है तेरे सिवा
सारे जग को छोड़ बाबा आया तेरे।।

संकट ने मुझे रुलाया है हर पल मुझको तो सताया है
पग पग में ठोकर खाया हु सिर्फ निराशा ही पाया हु
मेहंदीपुर के बाबा मेरा करना कल्याण
अब तो जल्दी आजा बाबा मैं हु परेशान
सारे जग को छोड़ बाबा आया तेरे द्वार।।

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