सुनो हरी मेरी करुण पुकार

मेरी करुण पुकार
मेरी करुण पुकार
सुनो हरी मेरी करुण पुकार
आन पड़ी मजधार में नैया
आन पड़ी मजधार में नैया, तू ही पार उतार
सुनो हरी मेरी करुण पुकार

शरण पड़े को तुम अपनाते देते प्रेम उपहार,
कारण रहित किरपा करते तुम सब के तुम आधार,
सुनो हरी मेरी करुण पुकार

मैं तो साधन हीन दीन हु तुम सब जाननहार,
देर है पर अंधेर नही है कहते संत पुकार
सुनो हरी मेरी करुण पुकार

तुम तो हो बिनु हेतु सनेही करुना के भण्डार,
मांगू भीख दया की केवल पड़ी तुम्हारे द्वार
सुनो हरी मेरी करुण पुकार

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