हनुमान कथा – वीर हनुमान जय जय हनुमान

कथा सुनो श्री बजरंगी बलि की
पावन कथा महाबली की
जापे निरन्तर राम का नाम का नाम
वीर हनुमान जय जय हनुमान

हो स्वर्ग अप्सरा माता अंजनी
राजा केसरी की थी पत्नी
इसका नाम
वीर हनुमान जय जय हनुमान

पति और पत्नी प्रेम से रहते
पर्वत ऊपर विचरण करते
काने लगे दोनों विश्राम
वीर हनुमान जय जय हनुमान

ऐसा पावन का झोका आया
साड़ी का पल्ला सरकाया
अंजनी करती क्रोध तमाम
वीर हनुमान जय जय हनुमान

हो पावन देव फिर सम्मुख आये
अंजनी माँ को वचन सुनाये
दिया पुत्र का वरदान
वीर हनुमान जय जय हनुमान

हे देवी मत घबराओ
मुझे गलत ना दोष लगाओ
होगा पुत्र तेरा बलवान
वीर हनुमान जय जय हनुमान

तेरे पुत्र के साथ रहूँगा
उसकी रक्षा सदा करूँगा
होगा उसका जग में नाम
वीर हनुमान जय जय हनुमान

कान के द्वारा गर्भ में आये
शिव अंशी हनुमत कहलाये
अंजनी बने जग में हनुमान
वीर हनुमान जय जय हनुमान

चैत्र शुक्ल दिन मंगल आया
हनुमान ने जनम पाया
मिला तपस्या का परिणाम
वीर हनुमान जय जय हनुमान

बाल काल में कला दिखाए
हनुमत जी नटखट कहलाये
सूरज को रख मुख में हनुमान
वीर हनुमान जय जय हनुमान

विनती करके देव मनाये
छोड़ा तब ये सूरज ये बताये
वीर हनुमान जय जय हनुमान

सूर्य ग्रहण का समाये जब आया
राहू ने जब बल दिखलाया
उससे हारते है हनुमान
वीर हनुमान जय जय हनुमान

इंद्रा देव ने वज्रा चलाया
बालक पर दया न खाया
मूर्छित होकर गिरे हनुमान
वीर हनुमान जय जय हनुमान

भाई हनु की ठुडी टूटी
सारी सृष्टि इंद्रा से रूठी
क्रोधित हुए वायु भगवन
वीर हनुमान जय जय हनुमान

हो वायु देव ने सजा है दीन्हि
वायु गति जब बंद कर दीन्हि
हो गए प्राणी जड़ सामान
वीर हनुमान जय जय हनुमान

पावन देव के क्रोध के मारे
जीव जंतु हुए मूर्छित सारे
गिरे भूमि पर सब जाए
वीर हनुमान जय जय हनुमान

सभी देवगन सम्मुख आये
वायु देव को सभी मनाये
इंद्रा का तोड़ दिया अभी मान
वीर हनुमान जय जय हनुमान

देव लोक से ब्रह्मा आये
जीवित कर हनुमान उठाये
शक्ति बल का दिया वरदान
वीर हनुमान जय जय हनुमान

पावन ने फिर उपकार किया है
सबको जीवन दान दिया है
सब गाये उनका गुणगान
वीर हनुमान जय जय हनुमान

सीता जी की खोज लगाने
चले पावन सूत राम दीवाने
समुन्द्र लांघ गए हनुमान
वीर हनुमान जय जय हनुमान

जामवंत अंगद सब हारे
हनुमत जी ने सब काज सांवरे
इनके लिए कोई कठिन न ना काम
वीर हनुमान जय जय हनुमान

लेने परीक्षा सुरसा आयी
लीला रचे हनुमान गोसाई
रूप विशाल रचे हनुमान
वीर हनुमान जय जय हनुमान

सुरसा ने जब मुख फैलाया
कद उतना हनुमत ने बढ़ाया
ज्ञान के दाता है हनुमान
सूक्षम रूप हनुमान दिखाए
सुरसा मुख से बहार आये
वीर हनुमान जय जय हनुमान

हनुमान से जब सुरसा हारी
बोली जय जय वीर तुम्हारी
बोली तुमसे कोई वीर नहीं हनुमान
वीर हनुमान जय जय हनुमान

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