हर राह पे हर मोड़ पर दाता मेहर कर

हर राह पे हर मोड़ पर
मुश्किल में है तेरा हर बशर
दाता मेहर कर दाता मेहर कर।।

तुझपर तिकी सबकी नजर
मुश्किल में है तेरा हर बशर
दाता मेहर कर दाता मेहर कर।।

हमसे हो गयी ऐसी क्या खता
किस पाप की ये मिली सजा
मालक मेरे कुछ तो बता
क्यों बेहाल है तेरा हर बशर
दाता मेहर कर दाता मेहर कर।।

हर आदमी बदहाल है
तेरी एक नजर का सवाल है
मेरी बात सुन मेरे मेहरबान
कुछ रेहम कर मेरे हाल पर
दाता मेहर कर दाता मेहर कर।।

तू तो मालिके दो जहां है
मेरा इश्क़ है भगवन है
तेरे नाम का दूँ मैं वास्ता
कर सात पर एहसान कर
दाता मेहर कर दाता मेहर कर।।

हर राह पे हर मोड़ पर
मुश्किल में है तेरा हर बशर
दाता मेहर कर दाता मेहर कर।।

Leave a Reply