aai shivratri te shiv da vivah nch nch bhagt dhamala rahe paa

आई शिवरात्रि ते शिव दा विवहा,
नच नच भगत धमाला रहे पा,
चढ़या है सारिया नु गोड़े गोड़े चा,
नच नच भगत धमाला रहे पा,

कण विच भीशुए गल विच फनियर,
जटा च गंगा बेहंदी,
मस्तक चंदा सोहना लगदा मात गोरजा केहन्दी,
जचदे ने पुरे रहे नंदी उते आ,
नच नच भगत धमाला रहे पा,
आई शिवरात्रि ते शिव दा विवहा,

शुक्र शनिशर पौंदे भरथु रल के भूत चढ़ेला,
राहु केतु पौन बोलियां पौंदे पये ने पेहला,
चक देने पव देनी धरती हला,
नच नच भगत धमाला रहे पा,
आई शिवरात्रि ते शिव दा विवहा,

जग मग जगदी श्रिष्टि रूप इलाही चढ़या,
सारा जग पेया खुशिया मनोदा हाथ गोरा शिव फड़्या,
लिख्दा समीर मणि गुण रहा गा,
नच नच भगत धमाला रहे पा,
आई शिवरात्रि ते शिव दा विवहा

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