bakshde apni sharn faryad hai faryaad hai

बकशदे अपनी शरण फर्याद है फर्याद है,

कैसे मैं आउ सँवारे मैंने गुन्हा इतने किये,
आई रही मुझको शर्म फर्याद है फर्याद है,
बकशदे अपनी शरण फर्याद है फर्याद है,

तूने बक्शे है हज़ारो लाखो करोड़ो अन गिनत,
मुझे पे भी कर नजरे कर्म फर्याद है फर्याद है,
बकशदे अपनी शरण फर्याद है फर्याद है,

जग की दल दल में फसा हु,
कुछ तो तेरा भी फ़र्ज़ है,
आ निभा अपना कर्म फर्याद है फर्याद है,
बकशदे अपनी शरण फर्याद है फर्याद है,

माँ के समाब की है रोशन कया करू तारीफ मैं,
होती है दिल की नरम फर्याद है फर्याद है,
बकशदे अपनी शरण फर्याद है फर्याद है,

दुर्गा भजन

Leave a Reply