bhaang ragad ke pilaau bhola mood bna le ne

भांग रगड़ के पिलाऊ भोला मुड़ बना ले ने,
चल हरिद्वार चालागे नंदी तेरा सजा ले ने,

भर भर लौटे पिलादे गोरा आज न नाचू गा,
कावड़िया के मेले में मैं जम के नाचू गा,

सब कुछ छोड़ के चालु गोदी गणपति में उठाऊ,
हरिकी पौड़ी पे मैं घोटे गंगा में लाउ,
फिर हाथ पकड़ के भोले संग तू मने नचा ले ने,
हरिद्वार चालागे नंदी तेरा सजा ले ने,

जल्दी हो ले त्यार गोरा लावे न देरी,
मैं बम बम करके बोले देख बात भगत मेरी,
जो आस लगा के आ रहे उनके संकट काटू गा,
रे कावड़िया के मेले में मैं जम के नाचू गा,

काला चहल भी भोले तेरी भक्ति में खो रहा,
काम मिर्चपुर वाला तेरी मस्ती हो रहा,
कृष्ण ने कह के तेरे भजन गवा ले ने,
चल हरिद्वार चालागे नंदी तेरा सजा ले ने,

ना घने की आँख देखु भगत निराला से,
जी चावे जब सुने गाल गिला घरता डाला से,
इन भगतो के रहु साथ कदे न न्यारा बांटू गा,
रे कावड़िया के मेले में मैं जम के नाचू गा,

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