darsh dikha de sheravaliye bhagt ne bhukhe tere pyaar de

लमिया क़तारार विच लग के ऊंची ऊंची आवाज पाए मारदे,
दर्श दिखा दे शेरावालिये भगत ने भूखे तेरे प्यार दे

दुरो दुरो मैया तेरे दर ते श्रदा दी भेटा लेके आये ने,
कर ले काबुल माये भेटा नु श्रद्धा दे फूल माँ चढ़ाये ने,
थक गाइयाँ आखियाँ विचारियाँ वेख ले तू नैन भी पुकार दे,
दर्श दिखा दे शेरावालिये भगत ने भूखे तेरे प्यार दे

कोई भी न थोड़ तेरे दर ते कर दे तू पुरे साढ़े चा माँ,
मंगते माँ वन दर आ गये झोली विच पा दे माँ खैर माँ,
दर तेरा छड़ के माँ जाना नहीं चाहे साहनु कुकर नु मारदे,
दर्श दिखा दे शेरावालिये भगत ने भूखे तेरे प्यार दे

सब दियां भर दे तू झोलियाँ किसे नु भी करि न नराज माँ,
किसे ने भी दरों माँ जाना नि हर कोई रखी बैठा आस माँ,
तुलसी निमाणा दर आ गया बेठ्या माँ सच्ची सरकार दे,
दर्श दिखा दे शेरावालिये भगत ने भूखे तेरे प्यार दे

Leave a Reply