Gopi Geet with lyrics | गोपी गीत अर्थ सहित |Popular Krishna Bhajan

Gopi Geet with lyrics | गोपी गीत अर्थ सहित |Popular Krishna Bhajan Sanatan DharamYug



श्रीमद् भागवत के ह्रदय स्थल “रास पंचाध्यायी” में कृष्ण मन, प्राण, आत्मा, वाणी और इंद्रियों से रमण करते हैं| नाना प्रकार के रसों का प्रवाह जहां एकत्रित हो एकत्रित हो ,उसे रास कहते हैं| भगवान श्री कृष्ण कृष्ण ने महारास की रस वृष्टि से समस्त ब्रजमंडल को रसोप्लावित कर कृष्ण ने गोपियों को महारास का का दान किया| शरद पूर्णिमा के दिवस पर जब श्री कृष्ण गोपियों के संग अद्भुत एवं अलौकिक महारास में लीन थे तब गोपीयों को सौभाग्य मद का प्रमाद उत्पन्न हुआ| श्री कृष्ण गोपियों को अभिमान दोष से निवृत करने हेतु करने हेतु महारास से अंतर्ध्यान हो गए |अपने बीच श्रीकृष्ण को न पाकर गोपियां भावविभोर होकर प्रेम विरह की वेदना में श्रीकृष्ण को पुकारती हैं| अनंत गोपीयों के एक स्वर में एक भाव से पुकारे जाने वाले अर्पित शब्द प्रवाह को ही गोपी गीत कहा जाता है |गोपी गीत प्रमोन्मत बने भक्तों की अलौकिक वाणी है जिसमें गोपियां मन कर्म और वचन से कृष्णमयी हो गई हैं और उनका कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम अलौकिक शब्द रस बनकर गोपी गीत के रूप में प्रकट हुआ|
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In “Raas Panchadhyayi”, the heart place of Shrimad Bhagwat, Krishna rejoices with mind, life, soul, speech and senses. The place where the flow of various types of Rasas come together is called Rasa. Lord Shri Krishna Krishna inundated the entire Brajmandal with the rain of Maharas and donated the juice of Maharas to the Gopis.On the day of Sharad Purnima, when Shri Krishna was engrossed in the wonderful and supernatural Maharasa with the Gopis, the Gopis were intoxicated with good fortune. Shri Krishna disappeared from Maharas to liberate the Gopis from the vice of pride. Not finding Shri Krishna among them, the Gopis become emotional and call out to Shri Krishna in the pain of love and separation.The flow of words chanted with one voice by the infinite Gopis with one feeling is called Gopi Geet. Gopi Geet is the supernatural speech of the ecstatic devotees in which the Gopis have become Krishnamayi through their thoughts, actions and words and they have exclusive love for Krishna. The supernatural word became Ras and appeared in the form of Gopi Geet.
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जयति तेऽधिकं जन्मना व्रजः
श्रयत इन्दिरा शश्वदत्र हि।
दयित दृश्यतां दिक्षु तावका
स्त्वयि धृतासवस्त्वां विचिन्वते॥१॥
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कस्तूरी तिलकं ललाट पटले वक्ष: स्थले कौस्तुभं।
नासाग्रे वरमौक्तिकं करतले वेणु: करे कंकणं॥
भावार्थ:- हे श्रीकृष्ण! आपके मस्तक पर कस्तूरी तिलक सुशोभित है। आपके वक्ष पर देदीप्यमान कौस्तुभ मणि विराजित है, आपने नाक में सुंदर मोती पहना हुआ है, आपके हाथ में बांसुरी है और कलाई में आपने कंगन धारण किया हुआ है।

सर्वांगे हरि चन्दनं सुललितं कंठे च मुक्तावली।
गोपस्त्रीपरिवेष्टितो विजयते गोपाल चूडामणि:॥
भावार्थ:- हे हरि! आपकी सम्पूर्ण देह पर सुगन्धित चंदन लगा हुआ है और सुंदर कंठ मुक्ताहार से विभूषित है, आप सेवारत गोपियों के मुक्ति प्रदाता हैं, हे गोपाल! आप सर्व सौंदर्य पूर्ण हैं, आपकी जय हो।
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