guru jambheshvar ki aarati kije

गुरू जम्भेश्वर की आरती कीजे।
रूप अलोकिक सब निरखीजे।।

समराथल पर आप विराजे।
गल मोतियन की माला साजे।।

भंगवी टोपी रूप निराला।
माता हंसा लोहट जी के लाला।।

आदी विष्णु जी के हो अवतारी।
लीला अद्भुत है प्रभु थारी।।

सदानन्द पर किरपा कीजो।
मानव जनम सफल कर दीजो।।

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