jo so gaye hai kafan tirange ka odhkar

जो सो गए हैं कफ़न तिरंगे का ओढ़कर
चले गए हैं इस जहाँ से जो मुँह मोड़ कर
सरपरस्ती वतन की जिनके हाथों में थी –
है नमन उनको हमारा दोनों हाथों को जोड़कर
जो सो गए हैं कफ़न तिरंगे का ओढ़कर

उजड़ा उजड़ा है चमन सब यहाँ विरान है
फूल टूटे हैं – कूचा कूचा सब शमशान है
सूनी पत्थरीली आँखों में होंगें अब सपने कहाँ
चला गया है कोई अपना उन्हें छोड़कर
है नमन उनको हमारा दोनों हाथों को जोड़कर
जो सो गए हैं कफ़न तिरंगे का ओढ़कर

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