jra socho kanhiya jamana kya kahega

ज़रा सोचो कन्हैया ज़माना क्या कहेंगा
तेरे होते हुए भी कहीं जाना पड़ेगा
ज़रा सोचो कन्हैया……….

सिवा तेरे कभी भी ना माँगा है किसी से
मेरी तो हर ज़रूरत हुई पूरी तुम्ही से
कहीं मैं और जाऊं तो क्या अच्छा लगेगा
तेरे होते हुए भी कहीं जाना पड़ेगा
ज़रा सोचो कन्हैया……….

मेरी हस्ती तुम्ही से ये सारे जानते हैं
तुम्हारे नाम से ही मुझे पहचानते हैं
हँसे मुझ पर ज़माना तुम्हे कैसा लगेगा
तेरे होते हुए भी कहीं जाना पड़ेगा
ज़रा सोचो कन्हैया……….

कमी मुझमें है कोई तभी तो मैं हूँ हारा
भूल कर दोष मेरा मुझे दे दो सहारा
वरना हारे का साथी कौन तुमको कहेगा
तेरे होते हुए भी कहीं जाना पड़ेगा
ज़रा सोचो कन्हैया……….

जियूं जब तक मैं सोनू ना छूटे साथ तेरा
सिवा तेरे कहीं भी ना फैले हाथ मेरा
गई जो लाज मेरी ये कैसे तू सहेगा
तेरे होते हुए भी कहीं जाना पड़ेगा
ज़रा सोचो कन्हैया……….

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