khair pauni teri marji

ऐसी बैठ गये दुआरे तेरे आके,
योगी बैठ गये दुआरे तेरे आके,
खैर पौनी तेरी मर्जी,
लाये झंडे नाल रोट बना के,
खैर पौनी तेरी मर्जी,

तेरे दर नाल प्यार बाबा पा लिया,
तनु सच्ची मुचि दिल च वसा लिया,
सेवा करदे हां मन चित ला के,
खैर पौनी तेरी मर्जी,

बिन तेरे कुज चंगा नहीं लगदा,
तनु पौने जोगी मोह छड़ जग दा,
वर मंगदे हां फुला गल पाके.
खैर पौनी तेरी मर्जी,

राह मुक्ति दा योगी तू दिखा दे,
भेटा लिखने दी सोची पल्ले पा दे ,
तेरे दर ते सुना केवल आ के,
खैर पौनी तेरी मर्जी,

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