khelat shyam maatu sukh pawat tenu peet jhguliyan kamar kardhni

खेलत श्याम मातु सुख पावत

खेलत श्याम मातु सुख पावत,
तनु पीत झगुलिया कमर करधनी,
मुनि मन मोहत हियँ हर्षावत,
खेलत श्याम मातु सुख पावत—–

तुतलात कछु बोलत मधुरी,
गिरत परत उठि किलकत धावत,
खेलत श्याम मातु सुख पावत——–

बीच अधर दुई दंतुल सोहत,
लुढ़कत ठुमकत नूपुर बजावत,
खेलत श्याम मातु सुख पावत——-

मातु हरषि सिसु लेत बलैया,
गोंद उठाई उर कंठ लगावत,
खेलत श्याम मातु सुख पावत –—–

जो सुख सुर मुनि सपनेहुँ दुर्लभ,
सोई सुख मैया यशोमति पावत,
खेलत श्याम मातु सुख पावत—–।।

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