man jana dai vo aarti thari hum agiyaari khada khappar tor duvaari

मान जाना दाई वो, मान जाना वो॥
आरती थारी हुम अगियारी खाड़ा खप्पर तोर दुवारी।
झन रिसियाना दाई वो…..

का मंतर जंतर मा दाई, मै हर तोला रिझावव माँ
नई जनाव तोर मान मनेाती,कइसे के तोला मनावव माँ
तोर सेवा बर ओसरी पारी।सकलाये सगरो नर नारी।
अब थिरयाना दाई वो…..

दसो अंगूरी ले घेरी बेरी,नत नत अरजी गुजारव वो
मन मंदिर में तोरे नाव के सरधा के दियना बारव वो
तिहि दुनिया के हस रखवारी।कतको रूप के सिरजन हारी।
मोरो पतियाना दाई वो…..

तोर दिये अन धन परसादी,तोहिच बर ओ चघाये हव
नरियर भेला पान सुपारी,काचा लिमऊ मढाये हव
कारी पियर चाऊर भारी।बनथे बनॉकि तोर सहारी।
झन चिचियाना दाई वो…..

मया पबरित निछमल बंधना,दाई तिहि गाडियाये वो
फेर काबर दुलरू लइका बर,माता तै रिसियाये वो
सांत होगे जग के महतारी।गौतम तरस दरस बलीहारी।
तै सुरताना दाई वो…..

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