ni gal sun maata ratno

नि गल सुन माता रतनो,
सारे पिंड विच रोला काहदा पाया,
नि फकरा दी चिति लोई ते,
झूठा दाग बन्द्नामी वाला लाया,
नि गल सुन माता रतनो….

धर्म दा साहणु पुत्र बना के,
घर तू ल्याई सी शगन मना के,
नि ओह वेला याद कर ले,
जदो लाल सी तू अपना बनाया,
नि गल सुन माता रतनो…..

नोकर बना के विच तलाइया ,
बारा साल तेरियां मैं गौआ चराइया,
नी बिना धन थाहो अमिये,
तेरा सिर मथे हुकम व्जाया,
नि गल सुन माता रतनो……

ना मैं जटा दे खेत उजाड़े,
देख लै जा के लेन हुलारे,
क्यों मारे अज सहनु ठोकरा,
तेनु रता वी तरस ना आया,
नि गल सुन माता रतनो…

ना पीती लस्सी तेरी ना खादी रोटी,
चंगा होया नीत तेरी हो गई खोटी,
की तेरी साडी गल मूक गई,
मसा कर्जा माँ धर्मो दा लहियाँ,
नि गल सुन माता रतनो…

हूँ नहियो रहंदा तेरे घर च फकीरा,
शिव गुरु कहंदे बचा तोड़ जंजीरा,
हो दयोट गुफा वाजा मारदी,
सच कोमल जलंधरी सुनाया,
नि गल सुन माता रतनो

Leave a Reply