o guruvar aa jao darsh dikha jaao

भक्ति में शबरी ने श्रीराम को पाया था
भक्ति में प्रहलाद ने श्री कृष्ण को पाया था
कौन सी ऐसी भक्ति करु मैं मेरे घर गुरु आए
मैं ही मीरा मैं ही शबरी राम श्याम बन आओ
ओ गुरुवर आ जाओ ओ दर्श दिखा जाओ
ओ गुरुवर आ जाओ ओ दर्श दिखा जाओ

मैंने तुमसे गुरुवर एक बात छुपाई है
मन की बेरी में गुरुवर तेरी छवि छिपाई है
बिछड़ जो जाऊं मैं जो गुरुवर साथ देना तुम
मैंने तुमको अपना माना ध्यान जरा तुम देना
ओ गुरुवर आ जाओ ओ दर्श दिखा जाओ
ओ गुरुवर आ जाओ ओ दर्श दिखा जाओ।

Leave a Reply