दुर्गा सप्तशती दशम अध्याय

दुर्गा सप्तशती का दशम अध्याय "शुम्भ वध" पर है। ॥ श्रीदुर्गासप्तशती - दशमोऽध्यायः ॥ शुम्भ-वध ॥ ध्यानम् ॥ ॐ उत्तप्तहेमरुचिरां रविचन्द्रवह्नि- नेत्रां धनुश्शरयुताङ्‌कुशपाशशूलम्। रम्यैर्भुजैश्‍च दधतीं शिवशक्तिरूपां कामेश्‍वरीं हृदि भजामि धृतेन्दुलेखाम्॥ "ॐ"…

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दुर्गा सप्तशती नवम अध्याय

दुर्गा सप्तशती का नवम अध्याय "निशुम्भ वध" पर है। ॥ श्रीदुर्गासप्तशती - नवमोऽध्यायः ॥ निशुम्भ-वध ॥ ध्यानम् ॥ ॐ बन्धूककाञ्चननिभं रुचिराक्षमालां पाशाङ्कुशौ च वरदां निजबाहुदण्डैः। बिभ्राणमिन्दुशकलाभरणं त्रिनेत्र- मर्धाम्बिकेशमनिशं वपुराश्रयामि॥ "ॐ" राजोवाच॥1॥…

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दुर्गा सप्तशती अष्टम अध्याय

दुर्गा सप्तशती का अष्टम अध्याय "रक्तबीज वध" पर है। ॥ श्रीदुर्गासप्तशती - अष्टमोऽध्यायः ॥ रक्तबीज-वध ॥ ध्यानम् ॥ ॐ अरुणां करुणातरङ्‌गिताक्षीं धृतपाशाङ्‌कुशबाणचापहस्ताम्। अणिमादिभिरावृतां मयूखै- रहमित्येव विभावये भवानीम्॥ "ॐ" ऋषिरुवाच॥1॥ चण्डे च…

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दुर्गा सप्तशती सप्तम अध्याय

दुर्गा सप्तशती का सप्तम अध्याय "चण्ड और मुण्ड का वध" पर है। ॥ श्रीदुर्गासप्तशती - सप्तमोऽध्यायः ॥ चण्ड और मुण्डका वध ॥ ध्यानम् ॥ ॐ ध्यायेयं रत्‍नपीठे शुककलपठितं शृण्वतीं श्यामलाङ्‌गीं न्यस्तैकाङ्‌घ्रिं…

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दुर्गा सप्तशती षष्टम अध्याय

दुर्गा सप्तशती का षष्टम अध्याय "धूम्रलोचन वध" पर है। ॥ श्रीदुर्गासप्तशती - षष्ठोऽध्यायः ॥ धूम्रलोचन-वध ॥ ध्यानम् ॥ ॐ नागाधीश्‍वरविष्टरां फणिफणोत्तंसोरुरत्‍नावली- भास्वद्देहलतां दिवाकरनिभां नेत्रत्रयोद्भासिताम्। मालाकुम्भकपालनीरजकरां चन्द्रार्धचूडां परां सर्वज्ञेश्‍वरभैरवाङ्‌कनिलयां पद्मावतीं चिन्तये॥ "ॐ"…

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दुर्गा सप्तशती पञ्चम अध्याय

दुर्गा सप्तशती का पञ्चम अध्याय "दूत के साथ देवी की बातचीत" पर है। ॥ श्रीदुर्गासप्तशती - पञ्चमोऽध्यायः ॥ देवताओं द्वारा देवी की स्तुति,चण्ड-मुण्डके मुख से अम्बिका के रूप की प्रशंसा सुनकरशुम्भ…

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दुर्गा सप्तशती चतुर्थ अध्याय

दुर्गा सप्तशती का चतुर्थ अध्याय "देवी स्तुति" पर है। ॥ श्रीदुर्गासप्तशती - चतुर्थोऽध्यायः ॥ इन्द्रादि देवताओं द्वारा देवी की स्तुति ॥ ध्यानम् ॥ ॐ कालाभ्राभां कटाक्षैररिकुलभयदां मौलिबद्धेन्दुरेखां शड्‌खं चक्रं कृपाणं त्रिशिखमपि…

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दुर्गा सप्तशती तृतीय अध्याय

दुर्गा सप्तशती का तृतीय अध्याय "महिषासुर वध" पर है। ॥ श्रीदुर्गासप्तशती - तृतीयोऽध्यायः ॥ सेनापतियोंसहित महिषासुर का वध ॥ ध्यानम् ॥ ॐ उद्यद्भानुसहस्रकान्तिमरुणक्षौमां शिरोमालिकां रक्तालिप्तपयोधरां जपवटीं विद्यामभीतिं वरम्। हस्ताब्जैर्दधतीं त्रिनेत्रविलसद्वक्त्रारविन्दश्रियं देवीं…

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