paunahari mere sath hain humko darne ki kya baat hai

पौनाहारी मेरे साथ है,
हमको डरने की क्या बात है,
इनके रहते कोई कुछ कहे,
बोलो किस की ये औकात है,

छाये काली घटाये तोह क्या,
इनकी छतरी के निचे हूँ मैं,
आगे आगे ये चलता मेरे,
मेरे बाबा के पीछे हूँ मैं,
इसने पकड़ा मेरा हाथ है,
हमको डरने की क्या बात है,

क्यों मैं भटकूँ यहाँ और वहां,
तेरे चरणों में मेरा जहां,
छोड़ दुनिया के रिश्ते सभी,
तेरे चरणों में है बैढना
ये करता करामात है,
हमको डरने की क्या बात है,

लाये आनंद की जब वो घडी,
ऐसी महफ़िल सजाता है ये,
शर्मा क्यों न दीवाना बनी,
उसे जलवे दिखता है ये,
दिल चुराने में विख्याता है,
हमको डरने की क्या बात है,

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