radha ji ke payal ke ghungru nrit karte bikhar gaye

राधाजी के पायल के घुंघरू नृत्य करते बिखर गये,
श्यामा जी के पायल के घुंघरू नृत्य करते बिखर गये,

नव निधि कुञ्ज में नृत्य करे तो प्रीतम संग राधा प्यारी,
अध्भुत छवि है नित रास की जाये सखी सब बलहारी,
तेरी टूटी पायल बिखरे गुंगरू गुंगरू बिखर के किधर गये,
श्यामा जी के पायल के घुंघरू नृत्य करते बिखर गये,

मन मोहन मन में मेलिंग अति व्याकुलता भारी छाई,
नूपुर चौंक सुने नहीं तो कही पायल भी अति अकुलाई,
खोये किधर अनमोल वो घुंगरू इधर गये के उधर गये,
श्यामा जी के पायल के घुंघरू नृत्य करते बिखर गये,

श्री ललिता सखी सहजारी ढूंढ रही मिल कर घुंगरू,
सुनी पायल बिन घुंगरू के बंधे नहीं पग पे घुंगरू,
ना जाने ये कैसे बंधे पायल से कैसे उत्तर गये,
श्यामा जी के पायल के घुंघरू नृत्य करते बिखर गये,

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