sache paatshaah meri baksh khtaa

सच्चे पातशाह मेरी बक्श खता ,
मैं निमाना,
तू बेअंत तेरा अंत न जाना,
सचे पातशाह…

दीन छोड़दुनी संग लागा,
तेरा नाम ना जपया अभागा,
कोई गुण न पल्ले नरक न मेनू झले,
पाप कमाना तू बेअंत तेरा अंत न जाना,
सच्चे पातशाह मेरी बक्श खता …..

दर तेरे सवाली जो आवे,
मुहो मंगियाँ मुरादा ओह पावे,
मैं वी आया शरनी मेनू लाओ चरनी,
विरद पछाना तू बेअंत तेरा अंत न जाना,
सच्चे पातशाह मेरी बक्श खता …..

तर गये पापी नाम रट के,
कटी चोरासी नाम जप के,
विषर नाही दातार बक्शो हरी जी दा दरबार,
दर्श दिखाना तू बेअंत तेरा अंत न जाना,
सच्चे पातशाह मेरी बक्श खता …..

तू सरव कला दा ग्याता,
भेद तेरा किसे न जाता,
तू मेहरबान है तू दैआवान है,
तू सयाना तू बे अंत’ तेरा अंत न जाना,
सच्चे पातशाह मेरी बक्श खता …..

Leave a Reply